गुरुवार, 26 सितंबर 2019

सीबीआई वर्सेज सीबीआई, डीएसपी ने जॉइंट डायरेक्टर के खिलाफ खोला मोर्चा


सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की आपसी लड़ाई में मर्यादा गवां चुकी सीबीआई में अफसरों के बीच फिर से तलवारें खींच गयी हैं। इस बार सीबीआई के डीएसपी एनपी मिश्र ने जॉइंट डायरेक्टर अजय भटनागर को हटाने की मांग की है। मिश्रा ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में लिखे पत्र में लिखा है कि बकोरिया में फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष मारे गए थे। इस कांड की जांच खुद सीबीआई की स्पेशल सेल-1 के द्वारा की गई है। डीएसपी ने लिखा है कि सीबीआई में बड़े पद कर रहते हुए भटनागर इस केस को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए। अजय भटनागर झारखंड कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।
बकोरिया कांड के बाद बनाए गए थे एडीजी
8 जून 2015 को बकोरिया में कथित मुठभेड़ में 12 लोग मारे गए थे। मुठभेड़ पर विवाद होने के बाद तात्कालिन एडीजी रेजी डुंगडुंग को हटाकर अजय भटनागर को सीआईडी का एडीजी बनाया गया था। भटनागर के एडीजी रहने के दौरान परिजनों ने केस के अनुसंधान की धीमी रफ्तार व गड़बड़ी का आरोप लगाया था। जिसके बाद मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले को संज्ञान लिया था। आयोग ने भी सीआईडी को केस की धीमी जांच के लिए तब फटकार लगायी थी। बाद में भटनागर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में चले गए थे।
डीएसपी की ये भी है शिकायत
प्रधानमंत्री, सीबीआई निदेशक, सीवीसी को भी डीएसपी सीबीआई इंटरपोल एनपी मिश्रा ने पत्र भेजा है। पत्र में जिक्र है कि उनके ट्रांसफर के एक मामले में एक अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। लेकिन अजय भटनागर ने ट्रांसफर के मामले में जल्द सुनवाई के लिए पद का दुरूपयोग कर हाईकोर्ट में पीटिशन दायर किया है।

सोमवार, 23 सितंबर 2019

झारखंड और आतंक का पाकिस्तानी कनेक्शन

आतंकी संगठन की जद में कैसे फंस रहे झारखंडी युवा जानिए---
पाकिस्तान के कराची, कयोटो, पीओके तक जा कर लौटे अब्दुल सामी को दिल्ली स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। सामी जमशेदपुर के करीम सिटी कॉलेज का ड्राप आउट था , जिसे मुस्लिम एट्रोसिटी के नाम पर जिहाद के लिए प्रेरित किया गया था। सामी, अबु सुफियान जैसे युवाओं को मानगो में मौलाना कलीमुद्दीन के यहां वीडियो दिखा कर जिहाद के लिए प्रेरित किया जाता था।
झारखंड एटीएस के हत्थे चढ़े मौलाना कलीमुद्दीन के घर पर अलकायदा के बड़े नेता मौलाना अब्दुल रहमान कटकी का नियमित आना जाना था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी है कि कटकी की दिल्ली स्पेशल सेल के द्वारा साल 2016 में गिरफ्तारी के बाद कलीमुद्दीन बांग्लादेश भाग गया था।  बकरीद के दौरान वह बांग्लादेश से वापस कोलकाता लौटा था। कोलकाता के खिदिरपुर में कलीमुद्दीन एक धार्मिक स्थल को अपना ठिकाना बनाए हुए था। राज्य पुलिस के आला अधिकारियों को इस बात की जानकारी मिली थी, जिसके बाद से कमीमुद्दीन की गिरफ्तारी का प्रयास एजेंसियों के द्वारा किया गया था। एनआईए के आईजी अनिल शुक्ला ने भी मौलाना कलीमुद्दीन की गिरफ्तारी व आतंकी संगठनों की गतिविधि को लेकर पत्राचार किया था।
एटीएस के एक पत्र से खुलासा हुआ है कि मानगो में कलीमुद्दीन के घर पर अकबर मसूल, अब्दुल सामी, सूफियान, बंगलौर के युसूफ समेत अलकायदा के अन्य संदिग्धों का आना जाना था। कलीमुद्दीन के यहां होने वाली जेहाद संबंधी बैठकों में उसका बेटा उजैला भी शामिल होता था। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, कलीमुद्दीन के घर पर जेहाद संबंधी वीडियो दिखाया जाता था। साल 2011 में यहां बंगलौर का मसूद , कटमी समेत अन्य लोग पहली बार जूटे थे। कटकी के द्वारा ही जेहाद के नाम पर युवाओं को पाकिस्तान भेजा जाता था। कटकी ने अकरम मसूद नाम के एक युवक का पासपोर्ट भी साल 2011 में लिया था। अबू सुफियान नाम के आतंकी से भी कलीमुद्दीन से संपर्क था। अबू सफियान के अभी पाकिस्तान में होने की बात एजेंसियों के समक्ष सामने आयी है। सूफियान आजाद बस्ती के ग्रीन वैली में रहकर ट्यूशन पढ़ाने का काम करता था।
दुबई के रास्ते भेजा गया था करांची
साल 2013 में कटकी अब्दुल सामी समेत अन्य पंद्रह - सोलह युवाओं को कटक स्थित अपने मदरसे में ले गया था।  मदरसा कटक के हाईवे में निरमुंडी स्टेशन के समीप था। इसी मदरसे में चतरा का सूफियान, बंगलौर का युसूफ समेत कई लड़के थे। बंगलौर के युसुफ को कटकी ने सबसे पहले पाकिस्तान भेजा था, जहां से वह मोबाइल पर अब्दुल सामी, सूफियान के संपर्क में रहा करता था। साल 2014 के जनवरी- फरवरी महीने में युसूफ से संपर्क कर सूफियान और अब्दुल सामी कलकता के रास्ते दुबई गए। इसके बाद दोनों दुबई के रास्ते करांची गए। दुबई में पाकिस्तानी नागरिक जफर के यहां सूफियान और अब्दुल सामी दस दिनों तक रहे।
लश्कर ए तैयबा के ट्रेनिंग सेंटर में दी गई ट्रेनिंग
दस्तावेजों के मुताबिक, अब्दुल सामी और सूफियान दस दिनों तक दुबई में रहन के बाद फ्लाईट से करांची पहुंचे थे। करांची में आईएसआई के लोगों ने उन्हें रिसिव किया था। इसके बाद युसूफ के शेरशाह फैक्टरी में दोनों के रहने की व्यवस्था की गई थी। ढ़ाई महीनें तक शेरशाह फैक्टरी में रहने के बाद सूफियान और अब्दुल को लश्कर ए तैयबा के पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर स्थित ट्रेनिंग सेंटर में भेजा गया था। ट्रेनिंग सेंटर का प्रमुख अब्दुला नाम का आतंकी था, जिसे सभी वहां बड़ा उस्ताद कह कर पुकारते थे। अब्दुला पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर का रहने वाला था। उस ट्रेनिंग सेंटर में सिर्फ तीन लोगों को भी तब ट्रेनिंग दिया जा रहा था। तकरीबन चार महीनें तक ट्रेनिंग कैंप में एके 47, एलएमजी, इंसास चलाने और ग्रेनेड फेंकने की ट्रेनिंग दी गई। इन ट्रेनिंग कैंप में साउथ का रहने वाला अनरा, सूफियान और अब्दुल सामी शामिल हुए थे। ट्रेनिंग के बाद दुबारा सभी को कराची के मच्छर कॉलोनी में ठहराया गया था। इसके बाद युवाओं को गजवा ए इस्लाम के सेकेंड हेड अब्दुल शाह मजहर के पास ले जाया गया था, जिसे सभी गुलशने इकबाल नाम से पुकारते थे।
क्योटा के समीप दी गई दूसरी ट्रेनिंग
अब्दुला शाह मजहर से ठिकानें पर युवाओं को तकरीबन दस दिन रखा गया। इसके बाद उन्हें क्योटा शहर से आगे पसीन नामक जगह पर पंद्रह दिनों की एक्सप्लोसिव बनाने की ट्रेनिंग खालिद नाम के व्यक्ति ने दी थी। ट्रेनिंग की समाप्ति के बाद अफगानिस्तान काबुल से सटे एक स्थान पर भी रॉकेट लांचर चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी। दुबारा पसीन आने के बाद दो तीन दिनों बाद वापस युवकों को करांची भेजा गया था। अब्दुला शाह मजहर के यहां एक माह रूकने के बाद सूफियान और अब्दुला सामी रावलपिंडी गए थे। रावलपिंडी में इन युवाओं को ऐसी जगह ठकराया गया था, जहां जैमर भी लगा था। दिसंबर 2014 में अब्दुल सामी वापस दुबई आ गया, जबकि सूफियान पाकिस्तान में ही रूक गया था। वीजा अवधि खत्म होने के बाद अब्दुल सामी दुबई से काठमांडू आया, इसके बाद वहां से सड़क मार्ग से मार्च 2015 में जमशेदपुर आ गया था। दिसंबर 2015 में वह मेवात गया था,जहां स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार किया था। एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसारा सूफियान अब भी पाकिस्तान में ही लश्कर ए तैयबा के साथ है।

बुधवार, 14 अगस्त 2019

खालिस्तान का एजेंडा और नफरतों पर टिका पाकिस्तान

रैपर हार्ड कौर खालिस्तानी हो गयी और उधर खालिस्तान को हवा देने वाले पाकिस्तान में महाराजा रंजीत सिंह की प्रतिमा तोड़  दी गयी. खबर में खबर छुपी है , ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान के हर काम , हर नियत में कुछ खोट।  खालिस्तान को हाल के दिनों में पाकिस्तानी फेसबुक यूज़र जम कर अपना समर्थन दे रहे हैं. इन्टरनली पाकिस्तान में इनदिनों प्रो सिख एजेंडा भी चलाया जा रहा है. 1947 के बाद से खाली पड़ी सिख गुरुद्वारों , धर्मस्थलों का निर्माण कराया जा रहा. पहली नज़र में ये इतिहास सहजने की कोशिश नज़र आती है, लेकिन सच्चाई इससे इतर है. करतार सिंह कॉरिडोर के निर्माण के लिए बनी कमिटी में खालिस्तानी समर्थकों को जोड़ कर पाकिस्तान  अपने खालिस्तानी एजेंडे को साधने में लगा है।  भारत ने इस पर आपत्ति जताई तो पाकिस्तानी ट्रोलर्स को मौका मिल गया।  लेकिन पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों का हाल किसी से  नहीं छुपा. संयुक्त पंजाब के शासक महाराणा रंजीत सिंह की प्रतिमा का उद्घाटन बीते महीने लाहौर में किया गया था. लेकिन जेहादी मानसिकता से जूझ रहे पाकिस्तान की अवाम ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त  दिया। खालिस्तानी ही बताएं की पाकिस्तान और आईएसआई के एजेंडा को पूरा कर वह किस खालिस्तान का सपना पूरा करना चाहते हैं.

https://twitter.com/Payal_Rohatgi/status/1160955985101352961?s=19

https://twitter.com/GitaSKapoor/status/1161269183360860161?s=19
खुद का घर शीशा का.... 
फेसबुक ट्रोलर फेसबुक पर भारतीय मुस्लमान, सिख और कश्मीरियों के बहाने घेरने की कोशिश करते हैं। लेकिन पाकिस्तान के  अल्पसंख्यक  हिन्दुओं के हालत किसी से नहीं छिपे. हिन्दू लड़कियों के अपहरण और धर्मपरिवर्तन को लेकर वहां की हिन्दू जमात मुखर है. बलूच , अहमदिया पर जुल्म की दास्ताँ पाकिस्तान के गठन से साथ ही शुरू हो चूका था।

महाराजा की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया, dawn की खबर
क़ायदे आज़म ने जो कहा था वह बस भाषण था 
पाकिस्तान का गठन भले मुसलमानो के लिए किया गया था, लेकिन पाकिस्तान बनने के बाद अपने पहले भाषण में कायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था की वह ऐसे पाकिस्तान चाहते हैं जहाँ सभी धर्मावलम्बियों को अपने धर्म को मानने की पूरी आज़ादी हो. खैर , जिन्ना ने पाकिस्तान जरुरत बनाया लेकिन वो धर्म की नफरतों से उपजा मुल्क आज भी नफरत  अपनी बुनियाद बनाये बैठा है।